My Poem
सुभाष चंद्र का बाईस हज़ार करोड़ का सवाल,
NCLT के दरवाज़े पर पहुँचा पूरा मामला बेहाल।
छह करोड़ के केस हों या बड़े-बड़े घोटाले,
जनता पूछे—कब तक चलेंगे ये खेल निराले?
नीरव मोदी का नाम आया, सवाल हुए हजार,
माल्या भी देश छोड़ गया—बना बड़ा विवाद और वार।
जनता कहती है—भागने से पहले NCLT चले जाते,
कानून के सामने बैठते, हिसाब-किताब समझाते!
पर सवाल सिर्फ एक पार्टी से नहीं,
सवाल हर उस नेता से है जो चुप है कहीं।
कहाँ गया Opposition? कांग्रेस कहाँ, RJD कहाँ?
संसद में आवाज़ कहाँ, जनता के सवालों का जवाब कहाँ?
भारत में मुद्दे आते हैं, शोर मचता है,
फिर कुछ दिनों में सब शांत हो जाता है।
जनता को चाहिए नाटक नहीं—साफ़ जवाब,
किसका कितना पैसा, किसका क्या हिसाब?
न पक्ष बचना चाहिए, न विपक्ष का बहाना,
कानून सबके लिए एक—यही है लोकतंत्र का तराना।
देश नहीं, दुनिया भी देख रही है ये सवाल—
कब होगा हर बड़े आर्थिक मामले का पूरा हिसाब-किताब?
भारत बंद नहीं—भ्रष्टाचार और बेईमानी बंद करो,
पक्ष-विपक्ष की राजनीति से ऊपर उठकर,
देश के पैसे और जनता के विश्वास की हिफाज़त करो। 🇮🇳
जय हिंद 🇮🇳
जय भारत 🇮🇳
TAGS='poem'
Logged out — showing 371 public records only. Login to see 418 private items.
No memories match this filter.
Jump to detailed list ↓ · 371 clickable cards
Comments (0)
No comments yet. Be the first to share your thoughts!